Kadhi Pakora : भारतीय खानपान की बात हो और उसमें कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) का जिक्र ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता. यह डिश सिर्फ एक खास रेसिपी नहीं बल्कि एक खास एहसास है. जब जब घर में गरमा गरम कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) बनता है तब तब रसोई की महक पूरे घर में फैल जाती है और परिवार एक साथ बैठकर स्वाद का आनंद लेता है उत्तर भारत के लगभग हर राज्य में यह व्यंजन अपने अलग-अलग अंदाज में बनाया और खाया भी जाता है लेकिन हर जगह इसका स्वाद दिल को सुकून देने वाला होता है
कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) को लोग अक्सर आरामदायक भजन कहते हैं क्योंकि इसकी मलाईदार दही वाली कढ़ी और कुरकुरे पकोड़े मिलाकर खाने से एकदम खास बना देते हैं यह सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि यादों और रिश्तो को जोड़ने का भी माध्यम है
कढ़ी पकोड़े का इतिहास और महत्व
भारतीय रसोई का इतिहास बहुत ही पुराना है और हर दिशा की अपनी एक अलग ही कहानी होती है कड़ी का जिक्र भी भारत के कई प्राचीन ग्रंथो और आयुर्वेदिक ग में भी मिलता है दही, लक और बेसन से बनी यह दिशा पहले से ही बचाने में आसान और स्वास्थ्यवर्धक माने जाते रही है समय के साथ इसमें पकोड़े डाले जाने लगे और यह दिशा और भी लाजवाब बन गई
उत्तर भारत में इस मानसून या ठंडी के दिनों में जरूर बनाया जाता है कई घरों में यह त्योहार और खस्मों को पर भी बनाया जाता है यह कहना गलत नहीं होगा की कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) सिर्फ एक दिशा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के परंपरा का भी हिस्सा है

कड़ी का असली स्वाद
कड़ी का असली स्वाद उसकी खटास और मुलायम बनावट में छिपा होता है इसे दही और बेसन से मिलकर तैयार किया जाता है दही से आने वाली खटास और बेसन से मिलने वाली गाढ़ापन इसे बहुत खास बनाते हैं इसके बाद इसमें तड़का लगाया जाता है जिसमें राई, जीरा, सुखी लाल मिर्च, कड़ी पत्ता और हल्दी डाली जाती है यही तड़का कड़ी को असली पहचान देता है
धीमी आंच पर पकाई गई कड़ी का स्वाद और भी गहरा हो जाता है जब यह उबलते है तो उसकी खुशबू रसोई को भर देती है और खाने वालों की भूख अपने आप बढ़ जाती है
कड़ी के पकोड़े
अब अगर कड़ी की बात हो और पकौड़ों का जिक्र ना हो तो यह अधूरा सा लगता है पकोड़े बेसन से ही बनाए जाते हैं और इसमें प्याज आलू या पलक जैसी सब्जियां भी डाल दी जाती हैं इन्हें तेल में तलकर सुनहरा बनाया जाता है
जब यह गरमा गरम पकोड़े कड़ी में डाले जाते हैं तो धीरे-धीरे कड़ी का स्वाद सुख लेने है बाहर से थोड़े कुरकुरे और अंदर से नरम यह पकोड़े हरने वाले को खास बना देते हैं यही वजह है कि बच्चे हो या बूढ़े सबको कड़ी पकोड़ा बेहद पसंद आता
खाने का मजा
वैसे तो कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) चपाती के साथ भी खा सकते हैं लेकिन अगर बासमती चावल बने हो तो बात ही कुछ और होती है गरमा गरम कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) और नरम नरम चावल का मेल ऐसा होता है जिसे एक बार खाने वाला बार-बार याद करता है कई लोग तो इसे रोटी या पूरी के साथ भी खा लेते हैं और हर बार इसका स्वाद कुछ नया ही अनुभव देता है
घर की रसोई में जब यह बनता है तो अक्सर इसके साथ हरी मिर्च का अचार पापड़ यह सलाद में परोसा जाता है इससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है
पोषण और स्वास्थ्यवर्धक लाभ
हालांकि कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) एक स्वादिष्ट डिश है लेकिन यह स्वास्थ्यवर्धक भी है बेसन में प्रोटीन और फाइबर होता है जो शरीर को ऊर्जा देता है और पाचन को भी आसान बनाता है और वही दही में भी प्रोबायोटिक पाए जाते हैं जो आंतों को स्वस्थ रखते हैं और कैल्शियम की अच्छी मात्रा देते हैं कड़ी में डाले जाने वाले मसाले जैसे हल्दी जीरा और सरसों न केवल स्वाद बढ़ाते हैं
बल्कि हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है हल्दी सूजन कम करने में मदद करती है जiरा पाचन को अच्छा रखता है और सरसों शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता में मजबूत बनाता है अगर पकोड़े को टालते समय तेल की मात्रा पर ध्यान दिया जाए तो यह दिशा एक बेहतरीन और संतुलित आहार बन सकती है
त्योहार और पारिवारिक महत्व
भारत में कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) केवल रोजाना का खाना नहीं है बल्कि त्योहार और पारिवारिक मौका का भी हिस्सा है खासकर मानसून के मौसम में जब बाहर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर गरमा गरम कड़ी पकोड़ा पक रहा हो तो माहौल ही बदल जाता है परिवार के साथ बैठकर इसे खाने का मजा कुछ अलग ही होता है यही वजह है कि हर दिशा हर भारतीय हर घर में खास जगह रखनी है
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अलग-अलग राज्य में कड़ी पकोड़ा
- हालांकि कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) उत्तर भारत की खास पहचान है लेकिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग अंदाज में बनाया जाता है
- राजस्थान की कड़ी थोड़ी तीखी और मसालेदार होती है
- गुजरात में से मिठास का स्वाद भी डाला जाता है
- पंजाब के कड़ी गाड़ी और मसालेदार होती है और उसमें प्याज के पकोड़े जरुर डाले जाते हैं
- हर जगह का अंदाज अलग है लेकिन एक बात सब में समान है यह दिशा हर जगह लोगों को बेहद पसंद आती है
कढ़ी पकोड़ा ( Kadhi Pakora ) सिर्फ एक व्यंजन ही नहीं बल्कि भारतीय परंपरा और स्वाद का प्रतीक है यह परिवार को एक साथ लाता है मौसम को खास बनाता है और हर खाने में एक अलग ही खुशी भर देता है
इसकी मलाईदार दही वाली कढ़ी और कुरकुरे पकोड़े मिलकर एक ऐसा स्वाद बना देते हैं जो कभी ना कभी पुराना नहीं होता और ना ही बोरिंग लगता है चाहे आप इसे दोपहर के खाने में खाएं या रात के खाने में इसका मजा हमेशा दिल को सुकून देने वाला ही होता है अगर आप कभी थके हुए हो उदास हो यह बस एक स्वादिष्ट और आरामदायक भोजन की तलाश में हो तो कडी पकोडे से बेहतर कुछ नहीं यह व्यंजन सच में भारतीय रसोई का हीरा है और इसे हर किसी को चखना चाहिए